नात: ढूंढते हैं लोग उन जैसा बशर बेकार है
📅 31-03-2021 08:20 PM
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कविता
<p>ढूंढते हैं लोग उन जैसा बशर बेकार हैमुस्तफ़ा का मिस्ल कोई भी नहीं संसार में</p>
<p>बे खुदी होती है कैसी हसरते दीदार मेंडस लिया एक मार ने, एक यार को, एक ग़ार में</p>
<p>चौदहवीं के चांद में इतनी चमक है ही नहींनूर है जितना मेरे सरकार के रुखसार में</p>
<p>दर बदर जन्नत की खातिर क्यों भटकते हैं भलाखुल्द तो है आपके आ़माल में, किरदार में</p>
<p>अहले दानिश को पता देता है वह फ़िरदौस काजिसका दिल दीवाना होता है नबी के प्यार में</p>
<p>दोनों बाज़ू काट कर बातिल यज़ीदी खुश ना होंअब भी बाकी है बहुत हिम्मत अलमबरदार में</p>
<p>जैसे अहमद शहद घुल जाए दहेन में इस तरहचाशनी होती है नात के अशआ़र में</p>
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