नग़मा-ए-दीवाली

📅 31-10-2024 04:14 PM 👁 7 Readers 💬 0 Comments 🔁 0 Shares
कविता

<p>सारे जग पर वही छा गई रौशनीराम के शह्र से जो उठी रौशनी</p>
<p>क्यूँ न दीवाली ये छाए माहौल परझूट पर सच की है फ़तहा की रौशनी</p>
<p>उन की किस किस सिफ़त का बयाँ मैं करूँराम के हर अमल से उगी रौशनी</p>
<p>हर तरफ़ रात में था अँधेरा बहुतजगमगाए दिये तो हुई रौशनी</p>
<p>क्या अजब है कि बनती रही उम्र भररौशनी तीरगी, तीरगी रौशनी</p>
<p>छिड़ते ही तज़किरा राम की ज़ात काहो गई कुल फ़ज़ा रौशनी रौशनी</p>
<p>गुज़रे बनबास की काली रातों से हमतब कहीं जा के है ये मिली रौशनी</p>
<p>तेरा जीवन ऐ रावण अँधेरा है बसओर मेरे राम की ज़िंदगी रौशनी</p>
<p>ज़की तारिक़ बाराबंकवीसआदतगंज, बाराबंकी, यूपी</p>

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अबु शहमा अंसारी

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