आई ड्रॉप डालने से जॉनी वॉकर भी हो गए थे अंधे
<p>इंदौर में आई फ्लू फैला हुआ है।लाल आंखों पर काला चश्मा चढ़ाएं बहुत से लोग फिर रहे है। ये संक्रमित बीमारी है। एक दूसरे से फैलती है। नजरे मिलाना यानि बीमारी को दावत देना।</p>
<p>जब हम छोटे थे तो आंख आने पर स्कूल में बैठने भी नहीं दिया जाता था। आंखों में डालने के लिए सफेद रंग का कैप्सूल साईज ट्यूब आता था जिसे हम आंख में डालने वाला ट्यूब कहते थे। इलाज झंझट भरा लगता।</p>
<p>उस ट्यूब को फोड़कर आंखों में डालकर सो जाते थे सुबह उस ट्यूब से पलके और आंखे चिपक जाती थी । जिसे हम गर्म पानी से धोकर साफ करते ।</p>
<p>आजकल मार्केट में तरह~तरह की दवाई चलन में है।लोग कमाने के चक्कर में आंखों से खिलवाड़ कर रहे है।इसलिए आंखों में डालने वाली दवा का चुनाव सोच~समझकर करें…</p>
<p>खुद डॉक्टर ना बनेडॉक्टर की सलाह अनुसार सही दवा डाले।</p>
<p>क्योंकि लापरवाही से आंखों में डाली गई आई ड्रॉपआपकी आंखों की रोशनी भी छीन सकती है….आपको हमेशा~हमेशा के लिए अंधा बना सकती है।</p>
<p>ऐसी ही एक लापरवाही का शिकारमशहूर कॉमेडियन जॉनी वॉकर साहब भी हुए थे।</p>
<p>1933 के आसपास की बात है।फिल्म इंडस्ट्रीज के मशहूर कामेडियन जॉनी वाकर साहबजब साथ~आठ साल के रहे होंगे।</p>
<p>इंदौर में आई फ्लू फैला।आबादी कम थी। बावजूद जॉनी वाकर संक्रमित हो गए।जॉनी वाकर के पिताजी मालवा टेक्सटाइल मिल में मेनेजर/टाईम कीपर थे। उनके चाचा नए~नए डॉक्टर बने थे। इंदौर में उन्होंने दवाखाना खोल लिया।</p>
<p>लिहाजा जॉनी वॉकर के चाचा नेलाल~लाल आंखों में लाल दवा डाल दी।उन दिनों आंख आने पर लाल दवा की कुछ बूंदेंआंखों में डाली जाती थी।</p>
<p>चाचा ने पहले दिन आई ड्रॉप डाल दी।दूसरे दिन फिर आने को कहा।दूसरे दिन चाचा दवाखाने में नहीं थे। इसलिए कंपाउंडर ने नन्हे जॉनी की आंखों में लाल दवा डाल दी।शायद कुछ बूंदें ज्यादा पड़ गई।</p>
<p>जॉनी वाकर की आंखों में इन्फेक्शन हो गया और उनकीदाई आंख हमेशा के लिए खराब हो गई।</p>
<p>आंखों में डालने वाली लाल दवा उस जमाने में मशहूर थीलेकिन कितनी बूंदे डालना है इस बात की सावधानी जरूरी थी। जॉनी वाकर की उल्टे हाथ की आंख की रोशनी लाल दवा डालने से हमेशा~हमेशा के लिए चली गई। उन्हें दाई आंख से दिखाई नहीं देता था।</p>
<p>ये बात जॉनी वाकर ने एक इंटरव्यू के दौरान टॉम आल्टर को बताई थी।</p>
<p>आप भी देखें इंटरव्यू.....</p>
<p>https://youtube.com/shorts/Hk5AvQXpHKk?feature=share</p>
<p>जावेद शाह खजराना (लेखक)</p>
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