ताज़ा खबर
• फर्स्ट उत्तर प्रदेश स्टेट आशिहारा कराटे चैंपियनशिप का आयोजन 8 अक्टूबर को खोट्टा, कुशीनगर में• इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव एवं प्रदेश उपाध्यक्ष को मिला जनहित सर्वोच्च सम्मान 2023 का पुरस्कार• इंडियन ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन के कार्यकर्ताओं ने महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री प्रतिमा पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की• 154 वीं महात्मा गांधी जयंती पर एन. टी. चिल्ड्रेन एकेडमी में आयोजित हुआ कार्यक्रम।• गाँधी जयंती पर पुरस्कार वितरण व सम्मान समारोह का हुआ आयोजन• नेशनल थाईबाक्सिंग चैंपियनशिप के पदक विजेता खिलड़ियो को सम्मानित किया गया• नेशनल थाईबाक्सिंग चैंपियनशिप में उत्तर प्रदेश की टीम ने 5 स्वर्ण सहित 10 पदक जीते।• इमामे हुसैन की शहादत को किसी धर्म संप्रदाय तक सीमित नहीं रखा जा सकता• सामाजिक संरचना तथा राष्ट्र निर्माण में शिक्षक का महत्वपूर्ण योगदान- मो० रजि सिद्दीकी• फ़िराक़ तमाम अहल-ए-अदब तुझ को याद रखेंगे

सच का आईना दिखाती मुनव्वर राणा साहब की ग़ज़ल

📅 21-04-2022 05:07 AM 👁 4 Readers 💬 0 Comments 🔁 0 Shares
कविता

<p>अब फ़क़त शोर मचाने से नहीं कुछ होगा।सिर्फ होठों को हिलाने से नहीं कुछ होगा।।</p>
<p>ज़िन्दगी के लिए बेमौत ही मरते क्यों हो।अहले इमां हो तो शैतान से डरते क्यों हो।।</p>
<p>तुम भी महफूज़ कहाँ अपने ठिकाने पे हो।बादे अखलाक तुम्ही लोग निशाने पे हो।।</p>
<p>सारे ग़म सारे गिले शिकवे भुला के उठो।दुश्मनी जो भी है आपस में भुला के उठो।।</p>
<p>अब अगर एक न हो पाए तो मिट जाओगे।ख़ुश्क पत्त्तों की तरह तुम भी बिखर जाओगे।।</p>
<p>खुद को पहचानो की तुम लोग वफ़ा वाले हो।मुस्तफ़ा वाले हो मोमिन हो खुदा वाले हो।।</p>
<p>कुफ्र दम तोड़ दे टूटी हुई शमशीर के साथ।तुम निकल आओ अगर नारे तकबीर के साथ।।</p>
<p>अपने इस्लाम की तारीख उलट कर देखो ।अपना गुज़रा हुआ हर दौर पलट कर देखो।।</p>
<p>तुम पहाड़ों का जिगर चाक किया करते थे।तुम तो दरयाओं का रूख मोड़ दिया करते थे।।</p>
<p>तुमने खैबर को उखाड़ा था तुम्हे याद नहीं।तुमने बातिल को पिछाड़ा था तुम्हे याद नहीं।।।</p>
<p>फिरते रहते थे शबो रोज़ बियाबानो में।ज़िन्दगी काट दिया करते थे मैदानों में।।</p>
<p>रह के महलों में हर आयते हक़ भूल गए।ऐशो इशरत में पयंबर का सबक़ भूल गए।।</p>
<p>अमने आलम के अमीं ज़ुल्म की बदली छाई।ख़्वाब से जागो ये दादरी से अवाज़ आई।।</p>
<p>ठन्डे कमरे हंसी महलों से निकल कर आओ।फिर से तपते हु सहराओं में चल कर आओ।।</p>
<p>लेके इस्लाम के लश्कर की हर एक खुबी उठो।अपने सीने में लिए जज़्बाए ज़ुमी उठो।।</p>
<p>राहे हक़ में बढ़ो सामान सफ़र का बांधो।ताज़ ठोकर पे रखो सर पे अमामा बांधो।।</p>
<p>तुम जो चाहो तो जमाने को हिला सकते हो।फ़तह की एक नयी तारीख बना सकते हो।।</p>
<p>खुद को पहचानों तो सब अब भी संवर सकता है।दुश्मने दीं का शीराज़ा बिखर सकता है।।</p>
<p>हक़ परस्तों के फ़साने में कहीं मात नहीं।तुमसे टकराए "मुंनव़र" ज़माने की ये औक़ात नहीं।।</p>
<p>शायर: मुनव्वर राणा</p>

Give Reaction (0)

Share (0)

Comments (0)

Published By

📰 Editor ★★★★★
H

Hindi@Hamariaawaz

📍 Faizabad

📰 1048 Posts👁 974 Readers📊 0.9 Avg Readers

Reporter of News Home

More in this category

नग़मा-ए-दीवाली

कविता: रौशनी बन के छाई दीवाली

नग़म- ए- देश भक्ति

Most Popular Posts

गोला ब्लॉक के कोहड़ी ग्रामसभा मे ट्रैक्टर पलटने से ट्रैक्टर सीख रहे बालक की मृत्यु

👁 172 Views

मऊ जनपद में 50 लाख तथा उससे अधिक लागत के निर्माण कार्याे की होगी समीक्षा

👁 121 Views

सिर्फ दिल्ली में ही नहीं, COVID-19 वैक्सीन पूरे देश में मुफ्त होगी: डॉ हर्षवर्धन

👁 82 Views

ओडिशा में आज से सिनेमा घर खोलने की मिली अनुमति

👁 71 Views

रूस के गेदज़ुख मे 5.1 तीव्रता का भुकंप

👁 71 Views

WA