टूटी फूटी डेमोक्रेसी
<p>जहाँ सिर्फ़ नामों के बूते परलोगों को घेरा जाता होधर्म के आधार परसबको बाँटा जाता होजगह जगह पर नफ़रत कीसभाओं को सजाया जाता होजहाँ मिट्टी को भी किसीमासूम के ख़ून से रंगा जाता होसंप्रदायिकता की आग मेंहिंसा भड़काई जाती होजहाँ अदालतों के फ़ैसले भीएक तरफ़ा मालूम होते होंक़ानून के रखवाले भी दंगाईयोंके साथ खड़े नज़र आते होंजहाँ मज़लूमों को भीजेलों में बंद किया जाता होजहाँ टोपी हिजाब कपड़ों कोअलग निगाह से परखा जाता होसमानता की दुहाई देकरएक समुदाय को निशाना बनाया जाता होगाँधी आज़ाद अंबेडकर के उसूलों कोताक पर रख कर देश चलाया जाता होजहाँ राज नेता लोकतंत्र सेखिलवाड़ करते होंजहाँ जनतंत्र काभगवाकरण किया जाता होऐसी जम्हूरीयत कोऐसे सेक्युलरीज्म़ कोमैं नहीं मानतामैं नहीं जानता….!!!!!</p>
<p>कविता: सिद्दीक़ी मुहम्मद उवैस</p>
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