ताज़ा खबर
• फर्स्ट उत्तर प्रदेश स्टेट आशिहारा कराटे चैंपियनशिप का आयोजन 8 अक्टूबर को खोट्टा, कुशीनगर में• इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव एवं प्रदेश उपाध्यक्ष को मिला जनहित सर्वोच्च सम्मान 2023 का पुरस्कार• इंडियन ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन के कार्यकर्ताओं ने महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री प्रतिमा पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की• 154 वीं महात्मा गांधी जयंती पर एन. टी. चिल्ड्रेन एकेडमी में आयोजित हुआ कार्यक्रम।• गाँधी जयंती पर पुरस्कार वितरण व सम्मान समारोह का हुआ आयोजन• नेशनल थाईबाक्सिंग चैंपियनशिप के पदक विजेता खिलड़ियो को सम्मानित किया गया• नेशनल थाईबाक्सिंग चैंपियनशिप में उत्तर प्रदेश की टीम ने 5 स्वर्ण सहित 10 पदक जीते।• इमामे हुसैन की शहादत को किसी धर्म संप्रदाय तक सीमित नहीं रखा जा सकता• सामाजिक संरचना तथा राष्ट्र निर्माण में शिक्षक का महत्वपूर्ण योगदान- मो० रजि सिद्दीकी• फ़िराक़ तमाम अहल-ए-अदब तुझ को याद रखेंगे

ना कोई प्रचार-प्रसार और ना ही किसी मुस्लिम से मुलाकात फिर भी कैसे मुस्लमान बन गईं यह लड़कियां

📅 31-08-2023 06:46 AM 👁 3 Readers 💬 0 Comments 🔁 0 Shares
अंतरराष्ट्रीय

<p>डेनमार्क के एक द्वीप पर जहां एक भी मुस्लिम नहीं है, वहां 3 कॉलेज लड़कियों ने एक साथ इस्लाम धर्म अपना लिया और अपनी ज़िंदगी में कभी किसी मुस्लिम से नहीं मिलीं।ये हैं: यूलिया और उसकी बहन और दोस्त।शहादत का कलमा पढ़ने के अगले दिन जब वे हिजाब पहनकर क्लास में पहुँचीं तो प्रिंसिपल ने उन्हें बुलाया और पूछा, "तुम्हें किसने बहकाया?" उन्होंने कहा कि आज तक हम किसी मुस्लिम से नहीं मिले हैं. फिर आपकी काया कैसे बदल गयी ? यूलिया ने जवाब दिया कि जब हमने मीडिया में इस्लाम के ख़िलाफ़ प्रचार सुना तो तीनों ने इस्लाम पर शोध करने का फ़ैसला किया। अगर आप भी पूर्वाग्रहों को किनारे रखकर शोध करेंगे तो आपको इस धर्म की सच्चाई और मूल्य समझ में आ जाएगा। यह सुनकर प्रिंसिपल चुप हो गए।यूलिया 20 साल की है , वह कहती है कि मैं, मेरी बहन और मेरी दोस्त ने एक साथ इस कलमे को पढ़ा, यह हमारे जीवन का सबसे ख़ुशी का दिन था। हमारी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। शहादत का कलमा पढ़ने से हमें आत्मिक शांति और आराम मिला, जिसका वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता। अब तक हम किसी भी धार्मिक विद्वान से नहीं मिले हैं, आम मुसलमान तो दूर की बात है। नेट से जानकारी लेकर सभी आदेशों का पालन किया। इस्लाम क़ुबूल करने के बाद मैंने ख़ुद भी पवित्र क़ुरान पढ़ना शुरू कर दिया। तब मुझे उन सभी समस्याओं का उत्तर मिल गया जो पहले से ही मेरे मन में थीं। अब जब भी मुझे कोई मानसिक संकट होता है, तो मैं पवित्र क़ुरान की ओर रुख़ करती हूं तो मुझे हर सवाल का जवाब मिलता है और एक अजीब सा आनंद महसूस होता है। अब मैं अरबी सीखना चाहती हूं ताकि मैं सीधे पवित्र क़ुरान का उपयोग कर सकूं। यूलिया का कहना है कि अब मेरा मक़सद सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा है, चाहे लोग ख़ुश हों या नाराज़, मुझे वो सब करना है जिससे ख़ुदा होता है। मेरे पास जो कुछ भी है, वह मेरे प्रभु की अमानत है। मेरे कुछ चाहने वालों ने नमाज़, रोज़ा और हिजाब आदि देखकर कहा कि यह बहुत कठिन धर्म है, इसे छोड़ दो। इसके साथ ही मुझे इस्लाम से दूर करने के लिए हर हथकंडा अपनाया गया। इसके बजाय, मैंने उन्हें इस्लाम में आमंत्रित करना शुरू कर दिया। यूलिया कहती हैं, ''अब मैं एक पुराने घर में रसोइया का काम करती हूं।'' मैं एक ऐसा परिवार चाहती हूं जहां सभी सदस्य मुस्लिम हों और प्रति दिन पांच बार नमाज़ पढ़ें।</p>

Give Reaction (0)

Share (0)

Comments (0)

Published By

📰 Editor ★★★★★
H

Hindi@Hamariaawaz

📍 Faizabad

📰 1048 Posts👁 631 Readers📊 0.6 Avg Readers

Reporter of News Home

More in this category

Palestinian student Arij Asaliya returns to her school with only one eye

Iran: Stormy rains, floods disrupted normal life, 6 people died.

Israeli attacks killed 119 Palestinians in Gaza in last 72 hours.

Most Popular Posts

गोला ब्लॉक के कोहड़ी ग्रामसभा मे ट्रैक्टर पलटने से ट्रैक्टर सीख रहे बालक की मृत्यु

👁 170 Views

मऊ जनपद में 50 लाख तथा उससे अधिक लागत के निर्माण कार्याे की होगी समीक्षा

👁 118 Views

सिर्फ दिल्ली में ही नहीं, COVID-19 वैक्सीन पूरे देश में मुफ्त होगी: डॉ हर्षवर्धन

👁 81 Views

ओडिशा में आज से सिनेमा घर खोलने की मिली अनुमति

👁 69 Views

रूस के गेदज़ुख मे 5.1 तीव्रता का भुकंप

👁 68 Views

WA